राम मंदिर दान चोरी मामले को राम माधव ने निचले स्तर के कर्मचारियों द्वारा की गई एक बार की घटना बताया और कहा कि मंदिर प्रबंधन ने नए सीईओ नियुक्त कर व्यवस्था सुधार ली है।
बीजेपी के लिए जम्मू-कश्मीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके राम माधव की पार्टी में वापसी हुई है। नितिन नवीन की टीम में राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है। द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप से बातचीत में राम माधव ने पार्टी में अपनी पार्टी में वापसी, आरएसएस-बीजेपी संबंध, शिक्षा नीति, ‘दिमागी नक्सल’ बहस, 22 राज्यों में सत्ता सहित तमाम मुद्दों पर खुलकर बात की…
पार्टी में वापसी वापसी और रोल के सवाल पर राम माधव ने कहा कि उनकी नई जिम्मेदारियां पार्टी अध्यक्ष तय करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं 2024 में पार्टी में लौटा था, J&K चुनाव के प्रभारी के रूप में। तब से मैं पार्टी में हूं। अब मुझे पार्टी का एक उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अब हमारा काम क्या होगा या किन राज्यों या गतिविधियों की देखरेख करनी होगी, यह अगले कुछ दिनों में पार्टी अध्यक्ष तय करेंगे।”
आरएसएस और बीजेपी का रिश्ता कैसा है?
आरएसएस और बीजेपी के रिश्ते को उन्होंने ‘पारिवारिक’ बताया और कहा, “RSS बीजेपी के दिन-प्रतिदिन के कामकाज में दखल नहीं देता। जब भी किसी तरह की सलाह-मशविरे की जरूरत होती है, आरएसएस बीजेपी नेतृत्व के लिए हमेशा उपलब्ध रहता है। यह हमेशा एक पारिवारिक रिश्ता है। इसके अलावा पार्टी अपने फैसले खुद लेती है।”
क्या शिक्षा व्यवस्था का हो रहा ‘भगवाकरण’
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों से जुड़े सवाल पर राम माधव ने कहा कि पिछले 10 साल में शिक्षा क्षेत्र को वामपंथी नियंत्रण से मुक्त किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने शिक्षा को ज्ञान देने का असली माध्यम बनाया। नई शिक्षा नीति 2020 के जरिए एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था लागू की गई।”
RSS की मानसिकता के सवाल पर उन्होंने कहा कि संघ के लिए देश पहले हैं। राम माधव ने कहा, “आरएसएस की मानसिकता है – राष्ट्र पहले, देश के लिए काम करना, हमेशा देश की भलाई के लिए प्रतिबद्ध रहना। अगर ऐसी मानसिकता हावी होती है तो यह देश के लिए अच्छा है।”
‘दिमागी नक्सल’ और सोनिया गांधी की किताब पर क्या बोले?
प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से दिए गए ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान पर राम माधव ने कहा कि वे जल्दबाजी में कोई व्याख्या करने वाले नहीं हैं, जो बहस चल रही है उसका आनंद लें। उन्होंने कहा कि अगर कुछ लोग इससे बेचैन हैं तो उनकी बेचैनी का भी आनंद लें। बहस होने दें। दिमागी नक्सल मानसिकता वाले कौन हैं, लोगों को पता चले, बहस हो, बात हो।
सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन से जुड़े विवाद के संदर्भ में उन्होंने कहा, “मैं खुद लेखक हूं। मेरी किताबें प्रेस में जाती हैं। प्रकाशक संशोधन के सुझाव देते हैं। कुछ बातों पर सहमति होती है, कुछ पर नहीं। सोनिया की किताब के साथ भी यही हुआ। सरकार को क्यों घसीटें? यह लेखक और प्रकाशक के बीच की बात है। आखिरकार लेखक ने फैसला लिया कि वह उस प्रकाशक के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहतीं। इसमें सरकार कहां है?”
बीजेपी के सामने चुनौतियों पर क्या कहा?
बीजेपी की विस्तार योजना पर उन्होंने कहा कि पार्टी 22 राज्यों में सत्ता में है और खुद को चुनौती दे रही है। उन्होंने कहा, “जहां हम पहले से सत्ता में हैं जैसे उत्तर प्रदेश, वहां हम दोबारा चुनाव जीतने को लेकर बहुत आश्वस्त हैं। हमने अच्छा शासन दिया है। लोग नेतृत्व पसंद करते हैं। लेकिन कुछ राज्य ऐसे हैं जहां बीजेपी अभी सत्ता तक नहीं पहुंची है, वहां हम उस स्तर तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।”
राम माधव ने आगे कहा, “बीजेपी अपनी उपलब्धियों को ही अपनी चुनौती मानती है। अगर मैं 22 तक पहुंच गया हूं तो मैं उसी से संतुष्ट नहीं रहूंगा। मुझे 26, 28, 30 तक जाना चाहिए। यही हमारा तरीका है। आज देश में इतनी मजबूत और प्रमुख पार्टी होने के नाते हमें बाहर से चुनौती नहीं देखनी चाहिए, खुद को हर बार ऊपर उठाना चाहिए।”
क्या अन्य पार्टियों के नेताओं का ‘शिकार’ करती है बीजेपी?
इस सवाल के जवाब में राम माधव ने कहा कि बीजेपी कोई शिकार नहीं करती, लेकिन राजनीतिक दल अपने दरवाजे और खिड़कियां बंद नहीं रखते। जो लोग बीजेपी के शासन, विचारधारा और नेतृत्व से आकर्षित होकर आना चाहते हैं, उनके लिए दरवाजे खुले हैं। जो बीजेपी में आ रहे हैं, वे अपनी पार्टियों और नेताओं से पूरी तरह निराश हैं। उनकी अपनी नाकामियां उन्हें उन पार्टियों की ओर धकेल रही हैं जिनका भविष्य है और जो देश के लिए काम कर रही हैं।
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा कब बहाल होगा?
जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़े सवाल पर राम माधव ने कहा कि यह सरकार का फैसला है। उन्होंने कहा कि पीएम और होम मिनिस्टर जब भी वे उचित समझेंगे जम्मू-कश्मीर UT को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और अगले चुनाव में बीजेपी सरकार बनाने की कोशिश होगी।
मणिपुर के हालातों पर बात करते हुए राम माधव ने कहा, “मणिपुर में कई महीनों तक मुश्किल दौर रहा, मैं मानता हूं। लेकिन अभी स्थिति बहुत सुधर गई है। मुख्यमंत्री और अधिकारी राज्य के सभी हिस्सों में जाते हैं। पहाड़ी और घाटी के लोग आवाजाही कर रहे हैं। स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई है। इसका श्रेय केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और राज्य सरकार दोनों को जाता है। बहुजातीय राज्य में छोटी-मोटी तनाव हमेशा रहते हैं, लेकिन एक साल पहले जैसी स्थिति अब नहीं है।”
‘लोकतंत्र में प्रदर्शन हो सकते हैं’
हाल में देश के कई हिस्सों में युवाओं द्वारा किए गए प्रदर्शन पर राम माधव ने कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शन हो सकते हैं। लोकतंत्र आपको अपनी चिंता और शिकायत सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने की अनुमति देता है। हमारे युवाओं ने प्रदर्शन किया। युवाओं को अलग-अलग नामों से बांटने की जरूरत नहीं। भारत युवा देश है। उनकी समस्याएं थीं, उन्होंने प्रदर्शन किया। सरकार ने कार्रवाई की, वे संतुष्ट हुए और आगे के प्रदर्शन का आह्वान वापस ले लिया।
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राम माधव ने कहा था, “मोदी के कंधों पर बंदूक रखकर लड़ाई में उतरने की कोशिश न करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो आप उसी एक प्रतिशत (2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले वोट) पर रहेंगे।” पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।




