Ram Madhav
June 17, 2015

हम गिलगित-बालतिस्तान वासियों के संघर्ष के साथ हैं

Listen to this article now
00:00
--:--
भारत-पाकिस्तान विवादों में ताजा कड़ी जुड़ गई। पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित- बालतिस्तान क्षेत्र में नया चुनाव करा रहा है। मालूम हो कि अपने हिस्से वाले कश्मीर को पाकिस्तान अनेक अलग-अलग टुकड़ों में पहले ही बांट चुका है जिनमें एक गिलगित-बालतिस्तान है। पाकिस्तान एक हिस्सा चीन को सौंप चुका है। दो अन्य हिस्से हैं – हुंजा या उत्तरी इलाके और पाक अधिकृत कश्मीर जिसमें मीरपुर और मुजफ्फराबाद के क्षेत्र हैं। भारत सरकार इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज करा चुकी है। इस तथा अन्य मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, जम्मू-कश्मीर के पार्टी प्रभारी और भारतीय जनता पार्टी में विदेशी मामलों को देख रहे राम माधव ने आउटलुक हिंदी से बात की। ”

 

पाक कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बालतिस्तान में चुनाव को आप कैसे देखते हैं?

यह पाकिस्तान को खुद को छुपाने की एक और कोशिश है। उस हिस्से की सच्चाई सभी जानते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इससे वाकिफ है। यह एक तरह से पाकिस्तान की लीपापोती का प्रयास है। वहां जो भी गतिविधि चल रही है वह गलत है। पाकिस्तान का झुकाव हमेशा से ही गलत तौर-तरीकों की ओर रहा है। गिलगित-बालतिस्तान भारत का अभिन्न अंग है।

 

हम पाकिस्तान की इन हरकतों को रोक क्यों नहीं पा रहे हैं? गिलगित-बालतिस्तान एंमपॉवरमेंट एंड सेल्फ गवरमेंट ऑर्डर के क्या मायने हैं? क्या यह अपने कब्जे वाले हिस्से पर पाकिस्तान का शिकंजा और कसने का प्रयास है?

हरकतें इसलिए नहीं रुक रही हैं कि पाकिस्तान तय कर चुका है कि वह कोई भी अच्छा काम नहीं करेगा। जिस आदेश की आप बात कर रही हैं, उसके कोई मायने नहीं हैं। उस क्षेत्र में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। जनता का उत्पीड़न हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे देखना चाहिए और मानवाधिकार हननके बारे में आवाज उठानी  चाहिए।

 

तो क्या इस मुद्दे को भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले कर जाए?

हम तीसरे गुट का हस्तक्षेप नहीं चाहते। जो भी बात होगी, दोनों देश अपने स्तर पर सुलझाएंगे। हम हमेशा ही साफ नीयत की बातचीत को बढ़ावा देते हैं।

 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की क्या नीतियां हैं?

देखिए, पहले तो यह समझना जरूरी है कि विदेश नीति सरकार बदलने के साथ ही आमूलचूल नहीं बदल जाती। हां, हमारी पार्टी और सरकार अलग ढंग से सोचती जरूर है। अटल जी के कार्यकाल में भी यह सभी ने स्पष्ट रूप से महसूस किया होगा। संबंध सुधारने में हमने न तब कोशिश में कमी रखी थी न अब रख रहे हैं। यही कारण था कि अटल जी लाहौर के लिए बस की शुरुआत की। जनरल मुशर्रफ को आगरा में बातचीत के लिए बुलाया। मोदी जी के शपथ ग्रहण समारोह में भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया गया।

 

अगर ये चुनाव सफल रहते हैं तो क्या होगा?

अगर का जवाब अभी कैसे दिया जा सकता है।

 

विदेश मंत्रालय के विरोध का भी पाकिस्तान पर कोई असर नहीं है। इस विरोध का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव कितना होगा, क्या पाकिस्तान दबाव में आएगा?

मैंने पहले ही कहा कि पाकिस्तान तय कर चुका है कि वह संबंध सुधारने के लिए कुछ नहीं करेगा। दुनिया को समझना चाहिए कि वहां के लोगों की आवश्यकता क्या है। गिलगित-बालतिस्तान के जो लोग संघर्ष कर रहे हैं उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। यह षडयंत्र है और छद्म पहचान की कोशिश है, यह सभी को समझ आ रहा है।

 

जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिल कर गठबंधन सरकार बनाई है। क्या यह इस क्रिया की प्रतिक्रिया है?

पाकिस्तान कभी नहीं चाहता कि जम्मू-कश्मीर में स्थिर सरकार रहे। वहां आधारभूत संरचना का विकास हो, वहां की जनता की भलाई के लिए कुछ काम किया जाए। गांव-गांव और दूर-दराज के इलाकों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचे। वह हमेशा वहां अस्थिर हालात बनाए रखना चाहता है और इसके लिए हर संभव प्रयास भी करता है। जब वहां काम होगा तो परेशानी तो होगी ही। एक स्थिर सरकार को देखना वह हजम नहीं कर पा रहा है। जो जमीन उसकी नहीं, वह उस पर चुनावी दिखावा कर रहा है।

 

8 जून के बाद भी क्या पाकिस्तान से संबंध सुधारने की प्रक्रिया जारी रहेगी?

मैं बस इतना कह सकता हूं हमारी नीयत साफ है। हमारी पार्टी की सरकार ने पहले क्या किया और अब क्या कर रही है, यह आप देख रही हैं। अटल जी ने कहा था, ’हम दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं बदल सकते।’ तो देखिए हम तो अच्छे पड़ोसी होने का फर्ज निभा ही रहे हैं। हां बस इतना है कि कोई हम पर हमला करेगा तो हम चुप नहीं बैठेंगे।

 

अन्य मुद्दों पर भी की बात

 

क्या कैप्टन सौरभ कालिया वाले मसले पर सरकार चूक गई?

जो विदेश मंत्रालय का बयान है वही मेरा भी है।

 

लेकिन क्या सरकार को पहले अंतरराष्ट्रीय कोर्ट… ?

मैंने कहा न, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी ने इस मुद्दे पर बहुत अच्छे ढंग से बात रखी है।

 

क्या अब भी लगता है कि अटल जी की तरह मोदी जी को पाकिस्तान यात्रा करनी चाहिए?

इसका जवाब तो प्रधानमंत्री जी ही दे सकते हैं।

 

पार्टी की अगली अग्नि परीक्षा बिहार चुनाव है?

अग्नि परीक्षा मत बोलिए। अग्नि परीक्षा से कठिनाई का बोध होता है। हम वहां जीत रहे हैं।

 

दिल्ली की हार?

सात राज्यों में जीते भी थे। हार से जो सीखना था, हम सीख चुके हैं।

 

आप संघ प्रचारक रहे हैं, अब भारतीय जनता पार्टी का काम देख रहे हैं। तीन मूल मुद्दे राम मंदिर, समान नागरिक संहिता, अनुच्छेद 370 पर पार्टी सत्ता में आने के बाद कमजोर क्यों पड़ जाती है?

किसने कहा कि इन मुद्दों पर पार्टी कमजोर पड़ी है। राम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हो इसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं। मंदिर बनाने के लिए सभी विकल्प खोलेंगे। मंदिर का मामला अभी कोर्ट में है। हमारा कमिटमेंट यथावत है। रही बात समान नागरिक संहिता और अनुच्छेद 370 की तो उस पर भी हमारी निष्ठा है। लार्जर सहमति (ज्यादा व्यापक सहमति) से हम काम करेंगे। किस तरीके से होगा वह हम पर छोड़िए। बस इतना याद रखिए इन मुद्दों को लेकर निष्ठा में कोई कमी नहीं है।

 

पार्टी सदस्यों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई है, लेकिन चर्चा थी कि दिल्ली के चुनाव में जितने सदस्य दिखाए गए उतने वोट भी पार्टी को नहीं मिले?

Published by Ram Madhav

Member, Board of Governors, India Foundation

राम माधव की बीजेपी में वापसी: नई भूमिका, युवाओं के प्रदर्शन और पार्टी के रोडमैप पर की बात । INTERVIEW

राम माधव की बीजेपी में वापसी: नई भूमिका, युवाओं के प्रदर्शन और पार्टी के रोडमैप पर की बात । INTERVIEW

June 17, 2015
Interview | India's World | A World in Transition

Interview | India's World | A World in Transition

June 17, 2015

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

15 + 9 =