National Convention of BJP SC Morcha

Posted on Saturday, 19 January 2019 | No Comments

Text of Shri Ram Madhav’s address at the National Convention of BJP SC Morcha on January 19, 2019 in Nagpur, Maharashtra

अनुसूचित जाति मोर्चा के राश्ट्रीय अध्यक्ष श्री विनोद सोनकर जी, केंद्रीय मंत्री आदरणीय थावर चंद्र जी, राश्ट्रीय महासचिव श्री भूपेंद्र यादव जी, राश्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री दुश्यंत गौतम जी, सह-संगठन मंत्री मान्यवर सतीष जी, पार्टी के और मोर्चा के सभी वरिश्ठ पदाधिकारी और सभी कार्यकर्ता बंधुओं।
यह सत्र बहुत छोटा रहने वाला है क्योंकि मुझे और भूपेंद्र जी को भी 10 मिनट के बाद इस सभा स्थल से तुरंत निकलना है। आपके लिए यह खुषखबरी है कि यह लंबा खिंचने वाला नहीं है।

मित्रों, अभी से तीन महीने के अंदर हमारे जनरल इलेक्षन आने वाले हैं। चुनाव की तैयारी की दृश्टि से ये जितने भी अधिवेषन हो रहे हैं जिनका जिक्र माननीय भूपेंद्र जी ने किया था, वे सभी बेहद महत्वूपर्ण हैं। हम सभी लोग आने वाले चुनाव में अपनी परिश्रम की पराकाश्ठा करके और एक बार देष में प्रचंड बहुमत के साथ मोदी जी की सरकार को वापस लाने के लिए प्रयासरत होना चाहिए।

हम एक राजनीतिक दल हैं तो राजनीतिक दल का एकमात्र कार्यक्रम अगर है तो वह चुनाव जीतना होता है मित्रो। बाकी जितने कार्यक्रम हम करते हैं, उस दृश्टि से साधक होने वाले कार्यक्रम हम करते हैं। कोई मेरी बात को गलत से न ले, मैं देष के कोई भी राजनीतिक दल से पूछता हूं कि क्या आपका लक्ष्य चुनाव जीतना है या नहीं। क्या आप कोई चैरिटेबल ऑर्गनाइजेषन हैं, राजनीति में हैं तो चुनाव जीतने के लिए ही हमको हमेषा परिश्रम करना होगा।

यह अलग बात है कि चुनाव जीतकर सरकार बनाना, कोई सरकार का आनंद लेने के लिए या लालबत्ती की गाड़ी में घूमने के लिए नहीं है, जो आदर्ष, जो सिद्धांत, जो लक्ष्य हमने अपने सामने रखा था, उसकी पूर्ति के लिए हमें सत्ता चाहिए। पर सत्ता चाहिए, इसलिए हरेक पार्टी कार्यकर्ता को उस किलर इंस्टिक्ट के साथ काम करना चाहिए। पराक्रम से काम करना चाहिए, ये नहीं कि परिस्थिति उतनी अनुकूल नहीं है देखा जाएगा। यह बात हमारे कार्यकर्ता के मुंह से षोभा नहीं देती है।
अगर परिस्थिति अनुकूल होती है तो हम सबकी जरूरत ही क्या है। प्रतिकूल परिस्थिति हो, अनुकूल परिस्थिति हो, एक पराक्रम से चुनाव जीतने का एक जिद पकड़ कर हमे इस चुनाव को फेस करना पड़ेगा क्योंकि इस बार इस चुनाव में हमसे अकेले लड़ने की हिम्मत या साहस किसी दल को नहीं था। इसलिए बड़े बड़े शडयंत्र या गठबंधन बनाकर हमारा सामना करने का प्रयास विपक्ष आज कर रहा है।

जैसा कि गडकरी ने कहा कि देखा जाएगा। जैसा हमारे अध्यक्ष जी कहते हैं कि 51 प्रतिषत की लड़ाई हम लडेंगे। सारे विपक्ष एक हो जाएं तो भी उनका सामना करके इस चुनाव में पहले से अच्छी सफलता प्राप्त करके फिर से सरकार बनाएंगे। पर ये किलर इंस्टिक्ट हमें चाहिए। यह बातों से होने वाला नहीं है क्योंकि येन केन प्रकारेण मोदी जी को सरकार को दोबरा नहीं आना है। यह एक ही लक्ष्य लेकर, कोई सिद्धांत नहीं, कोई एजेंडा नहीं, कोई समान कार्यक्रम नहीं, फिर भी अनेक दल एक साथ आगे आ रहे हैं। गुडलक टु दैम।

पर ये जो चैलेंज है, इससे हम डरेंगे नहीं। इस चैलेंज का हम हिम्मत से सामना करेंगे। पर एक बात याद रखना, साथ आ रहे हैं पर इसके साथ साथ मिलकर झूठ के प्रचार के आधार पर देष में संभ्रम निर्माण करने का भी प्रयास चल रहा है। इस झूठ के प्रचार को, इस संभ्रम को बहुत बारीकी से समझकर इसका हमको निराकरण करना होगा इस चुनाव में।

विषेश कर अनुसूचित समाज में हमारे अनुसूचित वर्ग के या हमारे ट्राइबल भाइयों के, वनवासी भाइयों के बीच में हमारी सरकार के प्रति हमारी पार्टी की विचारधारा के प्रति एक संभ्रम, एक नैगेटिव विचार निर्माण करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में हमको हमारे अपने अनुसूचति समाज भाइयों के बीच जाकर हमारे विचारों का, हमारे विजन का सही दृष्य उनके सामने स्थापित करने का प्रयास करना पड़ेगा मित्रों। और क्या बहस चलाई जा रही है। क्या बहस हमारे समाज के अंदर चल रही है, इसको समझकर हमें रणनीति बनानी होगी।

हमने हमेषा सब समाज की समानता को एक बहुत महान अंष मानकर काम किया है। इसलिए हमने पार्टी में एक कार्यक्रम भी दिया सामूहिक भोज का। इस कार्यक्रम को सफल तो करना ही है और एक बात याद रखना कि जैसा कि भूपेंद्र जी ने रेखांकित किया, यह कोई अनुसूचित जाति के लोगों को लाकर भोजन खिलाने का कार्यक्रम नहीं है। यह पूरे समाज, हम सब एक हैं, हम सब समान हैं, इस भावना से ओत-प्रोत हो, इसके लिए इस सामूहिक भोज का कार्यक्रम है। सभी लोग मिलकर सामूहिक भोज करें।

पर एक बात याद रखना मित्रों आज हमारे अपने दलित समाज के अंदर चर्चा, बहस केवल भोज तक नहीं है। भोज तो वैसे रेस्टोरेंट में भी हो जाता है। वहां भी सब मिलकर ही बैठते हैं, वहां कोई किसी की जात पूछता नहीं है, किचन में खाना किसने बनाया, यह रेस्टोरेंट में पूछा नहीं जाता है। पूछा जाता है तो जेल जाना पड़ता है हमारे पास कानून ऐसा है। पर आज अर्ज कुछ दूसरा है।
आज हमारे समाज के अंदर चाह क्या है कि मुझे निर्णय प्रक्रिया में स्थान चाहिए। मेरी बात सुनाई देनी चाहिए। मेरे विचारों को महत्व दिया जाना चाहिए। हाउ टु बिकम द पार्ट ऑफ डिसीजनमेकिंग प्रोसेस। यह आज समाज के अंदर चाह है। हमें उस समाज के अंदर की चाह को पहचान कर अपनी रणनीति बनानी होगी।

हमारे अनेक कार्यक्रमों में, अनेक गतिविधियों में हमारे समाज के भाइयों बहनों को बड़े प्रमाणों में षामिल करना पड़ेगा। पदाधिकारियों में षामिल करना पड़ेगा। पदाधिकारी यानी षिड्यूल कास्ट मोर्चा में षिड्यूल कास्ट के अधिकारी रहेंगे ही, पर क्या महिला मोर्चा में भी है या नहीं। क्या पार्टी के मुख्य संगठन में भी हैं कि नहीं। क्या युवा मोर्चा में भी हैं कि नहीं। यह बात हमको जांच करके, अगर नहीं हैं तो उनके लाने की जिम्मेदारी षिड्यूल कास्ट मोर्चा की है। याद रखना, षिड्यूल कास्ट मोर्चा बीजेपी की तरफ से षिड्यूल कास्ट के बीच में काम करने वाला संगठन मात्र नहीं है। षिड्यूल कास्ट की तरफ से बीजेपी में काम करने वाला संगठन षिड्यूल कास्ट मोर्चा है मित्रो।

दोनों तरफ से अच्छी तरह से काम करके हमारे पार्टी, हमारे संगठन, हमारी विचारधारा के साथ बड़ी संख्या में हमारे षिड्यूल कास्ट के लोग जुड़ें, इसका प्रयास करना पड़ेगा। और हमारी पार्टी के बारे में संभ्रम निर्माण किया जाता है। हम कितने भी बार बोले, फिर भी कहा जाता है कि ये आरक्षण विरोधी हैं। ये षिड्यूल कास्ट विरोधी हैं। सच्चाई दूसरी है जैसा कि हमारे गडकरी जी ने कहा परसेप्षन और रियलिटी में बहुत अंतर है।

इस देष में सर्वाधिक पार्लियामेंट सदस्य, सर्वाधिक विधायक, सर्वाधिक चुने गए लोग दलित समाज के अगर किसी एक पार्टी में हैं तो भारतीय जनता पार्टी में हैं। फिर भी प्रचार चलता है और इस प्रचार को हमें एकदम हिम्मत के साथ निराकरण करने का भी विषेश प्रयास करना चाहिए। इसलिए मित्रों, याद रखना कि षिड्यूल कास्ट समाज के अंदर, आज जैसा मैंने कहा, आज एमपावरमेंट की चाह है। मुझे स्थान चाहिए, मुझे सम्मान चाहिए।

इसलिए स्वाभाविक है कि केवल नेता महत्व का नहीं होता है। हम सब नेता हैं हमें यह कहते हुए अच्छा नहीं लगेगा। नेता वैसे महत्व के हैं। पर हमारे समाज में कोई वाइस-चांसलर बन गया, कोई आईएएस अधिकारी बन गया। कोई पुलिस अधिकारी बन गया, कोई प्रोफेसर बन गया, उनका बहुत सम्मान होता है क्योंकि वह सम्मान के स्थान पर पहुंचा है। ऐसा जो हमारे समाज के अंदर प्रबुद्ध वर्ग है। मैं तो यह मानता हूं कि हम जितना कहते हैं राजनीति में रहकर, उस बात से भी ज्यादा राजनीति से बाहर रहकर, कुछ षिक्षा क्षेत्र का बड़ा व्यक्ति कुछ प्रषासन का बड़ा व्यक्ति दलित समाज के बीच खड़ा होकर कोई विशय कहता है तो उसकी स्वीकार्यता हमारे समाज में अधिक होती है।

एक प्रषासनिक अधिकारी रिटायर हो गया। हमारे साथ खड़ा होकर मंच से कहेगा कि मोदी जी जैसा प्रधानमंत्री दोबारा आना चाहिए, उस बात को हमारा अपना समाज ज्यादा गंभीरता से लेगा। हमारे को सोचेगा कि इसे सत्ता चाहिए इसलिए बोल रहा है। इसलिए आज हमको जो हमारे समाज के प्रतिश्ठित लोग हैं डॉक्टर हैं, इंजीनियर हैं, आईएएस अधिकारी हैं, प्रोफेसर हैं, ऐसे सारे प्रबुद्ध वर्ग को हमारे साथ लाना चाहिए। उसके लिए अनुकूल बहस हमारा बनना चाहिए। हमारी विचारधारा की स्पश्टता चाहिए।

अम्बेडकर जी कहा करते थे कि, मेरा इम्प्रेषन तीन षब्द रहे हैं – लिबर्टी, इक्वेलिटी, प्रेटर्निटी। आप सब तो पढ़े ही होंगे अम्बेडकर को। आजादी, समानता और भ्रातृत्व भाव । पर अम्बेडकर जी कहा करते थे कि पहले दो चीज हैं लिबर्टी आजादी, वो तो संविधान के माध्यम से आ जाएगा। इक्वेलिटी कानून दे देगा। कानून के माध्यम से समानता आ गई है। आज कोई व्यक्ति असमान व्यवहार करेगा, जेल जाएगा।

पर प्रेटर्निटी को कौन सा कानून ला सकता है? भाई की भावना को कौन सा संविधान ला सकता है? अम्बेडकर जी कहा करते थे कि आज समस्या यह है कि भ्रातृत्व भाव कैसे लाना है। समाज में सह-भ्रातृत्व निर्माण कैसे करना है। हमारी जो विचारधारा है, हमारी जो सोच है, हमारा जो विजन है, केवल सोच विजन नहीं मित्रों, पांच साल के कार्यकाल के मोदी जी के कार्यक्रम देखिए। हमारा जो कार्यक्रम है, वह सह-भ्रातृत्व के लिए है। समाज में हम सब एक भाई-भाई हैं, एक समान अधिकार के लोग हैं, समान परिवार की संतान हैं, इस भाव को रियलाइज करने के लिए मोदी जी के सारे कार्यक्रम हैं।

सुबह उल्लेख हुआ टॉयलेट बनाना, या मैला उठाने का काम बंद करना, जन-धन योजना। ये कार्यक्रम अपने आपमें कुछ देने वाले कार्यक्रम हैं। पर इसके मूल में यही भावना है कि हम सबको समान बनना चाहिए। हम सबके अंदर एक परिवार की भावना चाहिए, एक कुटुम्ब की भावना, भ्रातृत्व भावना लानी चाहिए। यह हमारा विचार है।

मित्राऐं अन्य दलों ने दषकों से राजनीति की है। दषकों की राजनीति में दलित समाज को उन्होंने एक वोट बैंक के रूप में देखा, मनुश्य के रूप में देखा ही नहीं था। किसी समाज की भावनाओं की कद्र कभी नहीं हुई, इस समाज के वोट लूटने का प्रयास हुआ। 1990 तक अम्बेडकर जी को भारत रत्न देना चाहिए, यह ध्यान भी किसी को नहीं रहा।

34 ईयर आफ्टर हिस डैथ, 1956 में उनका निधन हुआ था। 34 साल लग गए भारत रत्न देने के लिए, वो भी कांग्रेस सरकार के षासनकाल में नहीं हुआ, गैर-कांग्रेसी सरकार के षासन में भारत रत्न मिला और एक गैर-कांग्रेसी बीजेपी सरकार ने महाराश्ट्र में उनको सम्मान दिया। पूरे देष ने सम्मान दिया, पंच तीर्थ बनाया। क्यों, क्योंकि हमारे लिए अम्बेडकर या दलित समाज सिर्फ वोट बैंक नहीं है मित्रो। हमारे लिए यह जीता-जागता हमारा अपना एक परिवार का अंग है। देष एक परिवार है जिसका दलित समुदाय एक महत्वपूर्ण अंग है, षिड्यूल कास्ट समाज है।

यह हमारा सिद्धांत है, यह केवल सिद्धांत नहीं, हमारा व्यवहार है हमारा आचरण है। इस बात को भी हमें हमारे समाज को समझाना पड़ेगा मित्रो, क्योंकि आज यह गलत प्रचार हो रहा है हमारे बारे में। हम इतना कुछ कर रहे हैं आप जानते हैं गडकरी जी ने कहा अगर मैं सारे कार्यक्रम बताते जाऊं तो बहुत समय लगेगा, सच में लगेगा, 129 योजनाएं प्रधानमंत्री जी ने पांच साल में बनाईं थीं। इनमें अधिकांष योजनाएं हमारे देष के वंचित समाज, गरीब समाज, षिड्यूल कास्ट समाज, पिछड़े समाज के लिए टारगेटेड थीं। पर यह सारा होने के बावजूद भी आज बहस क्या है। यह तो हिंदुत्ववादी है, यह तो सवर्ण है, यह तो दलित-विरोधी है, यह तो रिजर्वेषन-विरोधी है।

क्यों होता है.. क्यों होता है, क्योंकि हम पार्टी के विचार के नाते बड़े विचार को तो जानते हैं। हम तो हिंदुत्व पर अच्छा भाशण दे देते हैं यहां, पर हमारे अपने दलित समाज के अंदर आज क्या बहस है। आज क्या चाह है, आज क्या अर्ज है, इसकी कितनी समझ हमको होती है। इस पर हम कितना बोलते हैं, इसके लिए कितना प्रयास करते हैं। प्रयास यानी बाहर जाकर आंदोलन नहीं करना। पर क्या हम अपनी पार्टी के विशय अंदर उठाते हैं या नहीं उठाते। इस पार्टी के फोरम पर खड़ा होकर, सर इस विशय पर चर्चा होना है, यह हम कहते हैं या नहीं कहते हैं, कहना चाहिए। इसलिए मैंने कहा कि हम केवल पार्टी की तरफ से षिड्यूल कास्ट में हम कोई स्पीकर नहीं हैं। हम षिड्यूल कास्ट की तरफ से पार्टी प्रतिनिधि हैं। उसकी भी आवाज, उसका भी विचार इस तरफ लाना चाहिए। हमारा विचार हमारा सोच उस समाज में ले जाना चाहिए। इन बातों पर भी हम ध्यान दें।

मैंने जैसा कहा कि आने वाला चुनाव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है मित्रो। इस चुनाव में हमें जीतना ही है, क्योंकि आज विपक्ष हमें येन केन प्रकारण रोकने के प्रयास में लगा हुआ है। वे सफल नहीं होंगे, महागठबंधन बनाने के लिए निकले थे। पर वो महागठबंधन बनने वाला दृश्य दिख नहीं रहा है। बने या न बने, पर हमें आधे देष का समर्थन लेकर बड़े मेजोरिटी के साथ फिर सरकार बनाने की तरफ एक पराक्रम के साथ जाना है।

मैं यही बात कहता हूं किलर इंस्टिक्ट के साथ इस चुनाव की ओर जाना है। हारने का सवाल ही नहीं है। अच्छी जीत के साथ मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाएंगे। यह स्वप्न, यह उद्देष्य लेकर हम सब काम करें। षिड्यूल कास्ट मोर्चा की तरफ से भी काम करें और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के नाते भी काम करें। यह निवेदन करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं।

बहुत बहुत धन्यवाद
नमस्कार
जय हिंद
जय भीम

(Click here to access the video of the speech)

Author: Ram Madhav

National General Secretary, BJP; Member, Board of Governors, India Foundation

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