Ram Madhav
January 24, 2019

देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, विपक्ष का यह प्रचार गलत: राम माधव

बीजेपी के महासचिव राम माधव का कहना है कि विपक्ष बेरोजगारी को लेकर देश में भ्रम फैला रहा है और जनता की तरफ से ऐसी कोई आवाज नहीं आ रही है। राम माधव से बेरोजगारी, जम्मू-कश्मीर, आरक्षण सहित कई मुद्दों पर बात की पूनम पाण्डे ने – 

  • सरकार के किन कामों के बूते इस बार लोकसभा चुनाव में उतरेंगें
    हम जब 2014 में विपक्ष में रहकर चुनाव में गए थे, उस वक्त हमारी तीन ताकतें थी, मोदी जी की छवि, पोलिंग बूथ तक फैला हमारा संगठन और यूपीए के 10 साल की विफलता। अब पांच साल बाद हमारा मुख्य अजेंडा होगा- पीएम की निजी पॉप्युलैरिटी, वह अब 2014 से भी ज्यादा पॉप्युलर हैं, उनकी पॉप्युलैरिटी बढ़ी है। दूसरा- पांच साल में हमारी सरकार ने 130 से ज्यादा स्कीम्स के जरिए गांव, गरीब, किसान, महिला, किसानों के लिए काम किया है तो हमारा फोकस होगा हमारे लीडर और विकास का काम। इसी फोकस के साथ हम देश की जनता के सामने दोबारा जाएंगे।
  • बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है। क्या सरकार यह कहने की स्थिति में है कि रोजगार को लेकर किया वादा पूरा हुआ है? हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार का वादा था।
    रोजगार को लेकर विपक्ष भ्रम पैदा करने की कोशिश करता रहा है। फॉर्मल और इनफॉर्मल सेक्टर में बहुत नौकरी का निर्माण हुआ है। फॉर्मल सेक्टर में 1 करोड़ से ज्यादा नौकरी बनी। इनफॉर्मल सेक्टर का डेटा बाद में आएगा। हमने इनफॉर्मल सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए, जो रोजगार पैदा करने के साधक बने। विपक्ष का यह प्रचार एकदम गलत है कि देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, जनता की ओर से ऐसी कोई आवाज नहीं आती, अगर ऐसा होता तो युवा सड़क पर उतर आते। हमारी सरकार ने रोजगार की पूरी चिंता की। हमने पांच साल में लोगों को फ्री में पैसे देने के कार्यक्रम नहीं किए। ऐसे कार्यक्रम किए कि लोग अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
  • अच्छे दिन के वादे के साथ ये सरकार आई थी, क्या वाकई अच्छे दिन आए और किसके लिए
    सर्वाधिक जनता आज पहले से बेहतर जीवन जी रही है। देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है। विश्व बैंक जैसी संस्था मानती है कि विश्व में सबसे मजबूत 2-3 इकॉनमी में से एक भारत है। आज की तारीख में2 ग्रोथ रेट चीन का भी नहीं है। देश की आंतरिक और वाह्य सुरक्षा अच्छी है। पांच साल में बिना दंगे-फसाद का भारत दिखा है, बिना एक आतंकी हमले के। जम्मू-कश्मीर छोड़ दीजिए, वह घाटी का अलग मसला है। बाकी देश में एक भी आंतकी घटना नहीं हुई। इंटरनैशनल स्तर पर भी भारत का नाम और प्रतिष्ठा बढ़ी है।
  • क्या पीडीपी के साथ सरकार बनाना गलती थी, अब पछतावा है
    उस एक राजनीतिक परिस्थिति में हमें एक गठबंधन जम्मू कश्मीर में करना पड़ा। उस वक्त राजनीतिक दृष्टि से यह कदम उठाना था, हमने उठाया। हमने एक कठिन जनादेश का सम्मान करते हुए सोच विचार कर वहां सरकार बनाई। जितना अच्छा काम कर सकते थे लोगों के लिए काम किया। जब गठबंधन चल नहीं रहा था तब हम हिम्मत से बाहर भी आ गए।
  • संघ प्रमुख ने कहा कि जब युद्ध नहीं चल रहा है तब भी हमारे इतने सैनिक शहीद हो रहे हैं तो इसका मतलब है कि काम सही से नहीं हो रहा है। कैसे देखते हैं इस बयान को, क्या यह सरकार पर सवाल नहीं है
    पिछले चार साल में जम्मू-कश्मीर में सिक्यॉरिटी फोर्स का नुकसान कम हुआ है। आज से 6-7 साल पहले सिक्यॉरिटी फोर्स के लोग ज्यादा मरते थे, आतंकी कम मरते थे। पर अब बिल्कुल उल्टा है। 2018 को ही देखें तो 250 से ज्यादा आतंकी मारे गए और हमने अलग-अलग घटनाओं में 40-45 सिक्यॉरिटी फोर्स के लोगों को खोया। हालांकि हमारा एक भी सुरक्षाकर्मी मरता है तो यह बेहद दुख की बात है। हमारी कोशिश होगी कि हमारे सैनिकों को शहादत देने की जरूरत ना पड़े और हम आतंकवाद पूरा खत्म कर सकें।
  • तीन राज्यों में सत्ता हाथ से गई, लोकसभा पर इसका क्या फर्क पड़ेगा
    हमारी कोशिश रहेगी कि उसका असर लोकसभा चुनाव पर ना हो। वहां नई सरकार के कुशासन का अनुभव लोगों को मिलने लगा है। कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है। जो बड़े-बड़े वादे किए थे उन्हें निभाने की स्थिति में वहां की सरकार नहीं है। वहां की जनता पुनर्विचार करेगी और लोकसभा चुनाव आने तक हम अपनी स्ट्रैंथ फिर से हासिल कर पाएंगे, इसकी पूरी उम्मीद है। विधानसभा चुनाव में तीन राज्यों में जो ग्राउंड हमने खोया, उसे फिर हासिल करना हमारी प्रायॉरिटी है उस पर हम काम कर रहे हैं।
  • राम मंदिर का मसला क्या सरकार के गले की फांस बन गया है
    राम मंदिर कभी हमारे लिए राजनीतिक या चुनावी मुद्दा नहीं रहा। हमारी एक प्रतिबद्धता है। इस देश के करोड़ों देशवासी, बड़ा हिंदू समाज इसे लेकर आस्था रखता है। हमने 1989 में ही उस मुद्दे का समर्थन कर दिया है। आज भी पूरा समर्थन है। पर दिक्कत यह है कि केस सुप्रीम कोर्ट में है। हम चाहते हैं कि जल्दी सुनवाई पूरी हो। सबसे बड़ी बाधा तो कोर्ट में कांग्रेस बन रही है। वह दूसरे पक्ष की तरफ से वकील बनकर पहुंच जाते हैं। हम चाहते हैं कि जो फैसला आना है आ जाए। फिर सरकार को विचार करना हो तो हो सकता है। कोर्ट जल्दी निर्णय दे यही हम सबकी अपेक्षा है।
  • 10 प्रतिशत के दायरे में मुसलमानों को भी लाभ मिलना है लेकिन बीजेपी के ज्यादातर प्रवक्ता इसे अपर कास्ट हिन्दू के लिए प्रचारित क्यों कर रहे हैं?
    जो कहा गया वह गलत नहीं है। अभी तक रिजर्वेशन कैटिगरी में जो वर्ग नहीं आया है उसमें कुछ जातियां है, अन्य मजहब के भी हैं, उन सबके लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण मिल रहा है। अगर कोई कहता है कि तथाकथित उच्च जाति को मिल रहा है तो तथ्य के तौर पर यह गलत नहीं है। इस देश में आर्थिक कमजोरी के कारण आगे नहीं बढ़ पाने वाले लोग सभी समुदाय में है, उन्हें भी कुछ सरकारी सहूलियत मिले ये बात तो कई लोगों ने कही है, कांग्रेस ने भी कहा पर करने की हिम्मत किसी में नहीं थी। मोदीजी ने किया। मुख्य रूप से उन्हें फायदा मिलेगा जो रिजर्वेशन के अंदर अभी तक कवर नहीं हुए हैं। ऐसी जाति के लोगों को, जो मुख्य रूप से हिंदू समाज के लोग है इसलिए डिफेंसिव होकर सोचने का कोई कारण नहीं है। कुछ मुस्लिमों को भी फायदा मिलेगा, मुस्लिम की कुछ कास्ट पहले से ओबीसी में है उन्हें नहीं मिलेगा। यह व्यापक रूप से हिंदू समाज को फायदा देगा।
  • कॉमन सिविल कोड, धारा 370 और राम मंदिर यह तीन बड़े मुद्दे हुआ करते थे बीजेपी के वो पीछे क्यों गए?
    ये मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दे हैं। आज भी हमारी प्रतिबद्धता इन्हें लेकर है। कॉमन सिविल कोड की तरफ हमने एक बड़ा कदम उठाया- वह ट्रिपल तलाक का था। यह धीरे-धीरे होने वाली चीजें हैं इन्हें लेकर हमारी प्रतिबद्धता है। इसी तरह आर्टिकल 370 और राममंदिर इनमें हमारी प्रतिबद्धिता है। जैसे-जैसे मौका मिलेगा हम आगे बढ़ेंगे। इन्हें हम चुनाव से जोड़कर नहीं देखते।
  • मोदी और शाह के आने के बाद क्या बीजेपी में सामूहिक फैसले की परंपरा खत्म नहीं हुई?
    हमारी पार्टी ही अकेली पार्टी है जिसका रेगुलर पार्टी अधिवेशन होता है। हर तीन महीने में कभी राष्ट्रीय अधिवेशन होता है, कभी राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होती है, कार्यकारी मंडल की मीटिंग होती है। सामूहिक नेतृत्व का सिद्धांत हम इंप्लीमेंट करते हैं। हमारे पास मोदी जी जैसे बड़े नेता हैं, अमित शाह जैसा कुशल नेतृत्व है तो और पार्टियों को उसे लेकर दिक्कत है। उनका अध्यक्ष उनकी स्ट्रैंथ है या कमजोरी उन्हें ही समझ नहीं आ रहा है। हमारे बूथ से लेकर राज्य स्तर तक भी लगातार मीटिंग होती है।
  • मार्गदर्शक मंडल बना था लेकिन उसकी उपयोगिता क्या रही, क्या फैसले में उन्हें शामिल करते हैं
    प्रमुख फैसलों में मार्गदर्शक मंडल के विचार हमारे बड़े नेता जाकर लेते हैं। उनसे मिलते हैं, सलाह परामर्श करते हैं।
  • संघ की सरकार के कामों में किस हद तक दखलंदाज़ी है?
    संगठन के तौर पर संघ की कभी दखलअंदाजी नहीं होती, लेकिन विचार के तौर पर हम भी तो संघ हैं। क्या मोदी जी संघ नहीं है, क्या अमित शाह संघ नहीं है। हम सब उसी संघ से तो आए हैं, इसलिए विचारों के नाते तो हम सब एक हैं। तब कह सकते हो कि सीधे आप ही तो चला रहे हो पर संगठन के नाते संघ कभी हस्तक्षेप नहीं करता।

(The interview was originally published in Navbharat Times on January 24, 2019)

Published by Ram Madhav

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