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August 18, 2026

नितिन नवीन की टीम में राम माधव की वापसी, RSS-BJP के रिश्तों के लिए इसके क्या हैं मायने?

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बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की है, जिसमें राम माधव की छह साल बाद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में वापसी हुई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीजेपी ने बीते दिन सोमवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में एक नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की है। इन नियुक्तियों में राम माधव की वापसी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कई नेताओं का बने रहना खास बात है।

राम माधव की 6 साल बाद बीजेपी के मुख्य संगठन में वापसी हुई है और उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत आरएसएस प्रचारक के तौर पर की थी और संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख के रूप में काम किया। 2014 के आम चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद आरएसएस ने उन्हें बीजेपी संगठन में काम करने के लिए भेजा और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया।

पार्टी को मजबूत करने का किया काम

उन्होंने पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में बीजेपी की मौजूदगी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वे असम, त्रिपुरा और नागालैंड में बीजेपी सरकारें बनाने और पार्टी संगठन को मजबूत करने के काम में शामिल रहे।

यह भी देखे:- नितिन नवीन की टीम में राम माधव की वापसी, RSS-BJP के रिश्तों के लिए इसके क्या हैं मायने? – the return of ram madhav what it means for rss bjp relations

जम्मू-कश्मीर में, बीजेपी-पीडीपी गठबंधन सरकार बनाने के पीछे वे मुख्य रणनीतिकार थे। जब इस गठबंधन की वजह से बीजेपी को राजनीतिक नुकसान होने लगा तो पार्टी ने आखिरकार पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ अपना गठबंधन खत्म कर दिया। तत्कालीन गवर्नर सत्यपाल मलिक ने भी माधव को राज्य से जुड़े विवादों में घसीटने की कोशिश की, जिसका असर उनके राजनीतिक सफर पर पड़ा।

नड्डा की टीम में नहीं मिली जगह

जब सितंबर 2020 में बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा ने नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और टीम की घोषणा की तो माधव को राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया गया। इसके बाद वे आरएसएस के सक्रिय कामकाज में लौट आए और उन्हें संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नियुक्त किया गया।

बीजेपी में राम माधव की दूसरी पारी

बीजेपी में उनकी वापसी पार्टी संगठन में उनकी दूसरी पारी है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी नई जिम्मेदारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहम भूमिका निभाई। जब 2014 में माधव को आरएसएस से बीजेपी में भेजा गया था तो संघ ने कहा था कि उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी ने उन्हें इसका भरोसा दिलाया था।

माधव की वापसी के क्या हैं मायने?

हालांकि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद रोजमर्रा के संगठनात्मक कामकाज के लिए बहुत ज्यादा मौके नहीं देता, फिर भी यह पद आम तौर पर वरिष्ठ नेताओं को ही दिया जाता है लेकिन माधव के सिर्फ औपचारिक भूमिका तक सीमित रहने की संभावना कम है। हो सकता है कि भविष्य में नितिन नवीन उन्हें कोई ज्यादा अहम जिम्मेदारी सौंप दें।

माधव अंतरराष्ट्रीय मामलों और कूटनीति में भी सक्रिय रहे हैं। वे इंडिया फाउंडेशन नाम के थिंक टैंक से जुड़े प्रमुख लोगों में से एक हैं और उन्होंने कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े सम्मेलन आयोजित किए हैं।

आरएसएस के कौन-कौन से नेता टीम में हुए शामिल

इसके अलावा बीजेपी ने आरएसएस प्रचारक सुनील बंसल को भी राष्ट्रीय महासचिव बनाए रखा है। बंसल ने कई राज्यों में बीजेपी के चुनावी कैंपेन और संगठन में अहम भूमिका निभाई है। उत्तर प्रदेश में पार्टी की लगातार चार जीत में उनकी अहम भूमिका थी और बाद में उन्होंने तेलंगाना, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में पार्टी की कोशिशों का नेतृत्व किया। उन्होंने बंगाल में बीजेपी की जबरदस्त जीत में भी अहम भूमिका निभाई।

बंसल के साथ-साथ बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बने रहेंगे। संतोष को आरएसएस ने बीजेपी संगठन में नियुक्त किया था और वो पार्टी के सबसे अहम नेताओं में से एक बने हुए हैं। उन्हें आरएसएस के दो अन्य प्रचारकों शिव प्रकाश और सौदान सिंह का सहयोग मिलेगा, जो संगठन के संयुक्त महासचिव के तौर पर काम करते रहेंगे।

माधव की वापसी के साथ-साथ संतोष, प्रकाश, सिंह और बंसल की निरंतरता नई बीजेपी टीम को लंबी आरएसएस पृष्ठभूमि वाले नेताओं की एक मजबूत उपस्थिति दर्ज करती है।

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Source: Jagran
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Published by Ram Madhav

Member, Board of Governors, India Foundation

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